← सभी भजनकभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा।
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं,
बाद आँसू बहाने से क्या फायदा॥
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा॥
मैं तो मंदिर गया, पूजा आरती की,
पूजा करते ही मन में ख्याल आ गया।
कभी माँ-बाप की सेवा की ही नहीं,
सिर्फ पूजा कराने से क्या फायदा॥
मैं तो सत्संग गया, गुरु वाणी सुनी,
गुरु वाणी को सुनकर ख्याल आ गया।
जन्म मानव दया ना करी,
फिर मानव कहाने से क्या फायदा॥
मैंने दान किया, मैंने जप तप किया,
दान करते ही मन में ख्याल आ गया।
कभी भूखे को भोजन कराया नहीं,
दान लाखों का करने से क्या फायदा॥
गंगा नहाने हरिद्वार काशी गया,
गंगा नहाते ही मन में ख्याल आ गया।
तन को धोया मगर मन को धोया नहीं,
फिर गंगा नहाने से क्या फायदा॥
मैंने वेद पढ़े, मैंने शास्त्र पढ़े,
शास्त्र पढ़ते हुए ये ख्याल आ गया।
मैंने ज्ञान किसी को बाँटा नहीं,
फिर ज्ञानी कहाने से क्या फायदा॥
माँ-पिता के चरणों में ही चारों धाम,
आज यही मुक्ति का है धाम।
माता-पिता की सेवा की ही नहीं,
फिर तीर्थों में जाने का क्या फायदा॥
भक्ति का भजन
कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
✳
॥