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भक्ति का भजन

अब सौंप दिया इस जीवन का

भक्तिभक्तिसमर्पणप्रार्थनाईश्वरनारायण
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अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में। है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥ मेरा निश्चय बस एक यही, एक बार तुम्हें पा जाऊँ मैं। अर्पण कर दूँ दुनिया भर का, सब प्यार तुम्हारे हाथों में॥ जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ, जैसे जल में कमल का फूल रहे। मेरे सब गुण दोष समर्पित हों, उस करतार तुम्हारे हाथों में॥ यदि मानव का मुझे जन्म मिले, तो तव चरणों का पुजारी बनूँ। इस पूजक की एक-एक रग का, हो तार तुम्हारे हाथों में॥ जब-जब संसार का कैदी बनूँ, निष्काम भाव से करम करूँ। फिर अंत समय में प्राण तजूँ, निराकार तुम्हारे हाथों में॥ मुझमें-तुझमें बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो। मैं हूँ संसार के हाथों में, संसार तुम्हारे हाथों में॥
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